SIP vs FD : 2025 में कौन बेहतर है?

SIP और FD में क्या फर्क है? 2025 में कौन-सा विकल्प बेहतर रिटर्न और सुरक्षा देता है? SIP vs FD की पूरी तुलना यहां पढ़ें और सही निर्णय लें।

आज के समय में निवेश करना सिर्फ ज़रूरी नहीं, समझदारी भी है। लेकिन सवाल उठता है – SIP (Systematic Investment Plan) और FD (Fixed Deposit) में से कौन-सा विकल्प बेहतर है? इस लेख में हम जानेंगे दोनों विकल्पों की तुलना, फायदे-नुकसान और यह कि आपकी ज़रूरत के अनुसार कौन-सा विकल्प बेहतर रहेगा।

• SIP क्या है?

SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आप हर महीने एक तय राशि म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं। SIP शेयर बाजार से जुड़ा होता है, इसलिए इसमें उतार-चढ़ाव होता है लेकिन लंबे समय में बेहतर रिटर्न भी मिल सकता है।

~ SIP के फायदे :

- कम पैसों से निवेश शुरू (₹500 से भी कम) ।

- कंपाउंडिंग का लाभ।

- लंबी अवधि में महंगाई को मात देने की ताकत।

- टैक्स सेविंग विकल्प (ELSS SIP)।

~ SIP के नुकसान :

- शेयर मार्केट रिस्क के अधीन।

- गारंटीड रिटर्न नहीं।

- शॉर्ट टर्म में नुकसान संभव।

• FD क्या है?

FD (फिक्स्ड डिपॉज़िट) एक पारंपरिक निवेश विकल्प है जहाँ आप एक तय समय के लिए बैंक में पैसा जमा करते हैं और एक निश्चित ब्याज प्राप्त करते हैं। यह एक लो-रिस्क विकल्प माना जाता है।

~ FD के फायदे :

‌- रिटर्न गारंटीड होते हैं।

- सुरक्षित और स्थिर विकल्प।

- शॉर्ट टर्म और इमरजेंसी के लिए अच्छा।

- वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त ब्याज।

~ FD के नुकसान :

- महंगाई के मुकाबले कम रिटर्न।

- टैक्सेबल ब्याज (यदि ₹40,000 से ऊपर हो)।

- कंपाउंडिंग का फायदा SIP जितना नहीं।

SIP और FD दोनों के अपने फायदे और सीमाएँ हैं। जहाँ SIP आपको महंगाई को मात देने में मदद करता है, वहीं FD आपके पैसों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। 2025 में स्मार्ट निवेशक वही होगा जो दोनों का बैलेंस बनाएगा — यानी कम जोखिम के लिए FD और ग्रोथ के लिए SIP । यदि आप शुरुआत कर रहे हैं, तो SIP और FD दोनों में थोड़ा-थोड़ा निवेश करके अपना पोर्टफोलियो बनाएं। धीरे-धीरे समझ बढ़ने पर SIP का अनुपात बढ़ाएं।